खल्द

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लेख सूचना
खल्द
पुस्तक नाम हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3
पृष्ठ संख्या 307
भाषा हिन्दी देवनागरी
संपादक सुधाकर पांडेय
प्रकाशक नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी
मुद्रक नागरी मुद्रण वाराणसी
संस्करण सन्‌ 1976 ईसवी
उपलब्ध भारतडिस्कवरी पुस्तकालय
कॉपीराइट सूचना नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी
लेख सम्पादक भगवत शरण उपाध्याय

खल्द अरब की खाड़ी में गिरनेवाली नदियों-दजला और फरात के मुहाने पर बसा भूभाग। इसका अधिकांश भाग दोनों नदियों के द्वाब में, जिसके मुहाने पहले आज की तरह मिले हुए नहीं थे, बसा था और प्राचीन बाबुल (बेबिलोनिया) का दक्षिणी खंड था। इस खंड का बेबिलोनिया अथवा बाबुल नाम तब पड़ा जब सामी बाबुलियों ने उस पर अधिकार किया। उससे पहले, नदियों के द्वाब के इस भूभाग के प्राचीनतम निवासी सुमेरी थे जिनके नाम से संबंधित वह भूमि सुमेरिया कहलाती थी, जिसकी सुमेरी सभ्यता गैर-सामी थी। यद्यपि वह सुमेरी संस्कृति बाबुली सामी राजनीतिक सत्ता के नीचे दब गई तथापि शीघ्र ही उसे अनेक अंकुर, सामी अधिकार के बावजूद, फूट पड़े और सुमेरी भाषा, शब्दावली, लिपि तथा देवता बाबुलियों और उनके पश्चात असूरिया के असुरों के पूज्य बने। सुमेरी लिपि का साम्राज्य तो फारस और एलाम से लेकर आज के तुर्की तथा आमीनिया तक फैला था।

सुमेरियों के बाद खल्द में उस सामी जाति का निवास हुआ जो अरब से आई थी जिसके नेता यहूदियों के पितामह अब्राहिम (इब्राहिम) थे। बाइबिल की पुरानी पोथी (ओल्ड टेस्टामेंट) में ऊर के खल्दियों का जो उल्लेख हुआ है, संभवत: वह इसी जाति के प्रति है। जिन दिनों अब्राहम अपनी यहूदी जाति को लिए, दजला फरात का द्वाब लाँघ, सीरिया होते फिलिस्तान और मिस्र की ओर चले गए थे उन्हीं दिनों बाबुल को अपनी राजधानी बनाकर सामी सम्राट, रदम्मुराबी ने अपना साम्राज्य एलाम से भूमध्यसागर तक स्थापित किया और खल्द की शक्ति मिस्री फराऊ नों की शक्ति से टकराने लगी। बाबुली साम्राज्य को तोड़कर दजला फरात के उपरले द्वाब में बसनेवाले असुरों ने शीघ्र ही आज के समूचे इराक पर अधिकार कर लिया और खल्द उनकी ‘भुक्ति’ बना। प्राचीन अभिलेखों में असुर राजाओं ने खल्द को प्राय: इसी नाम से पुकारा है। शर्रु किन (ई. पू. 722-705) तथा सेनाखेरिब दोनों के अभिलेख खल्द राजा रोमेदाख बलादीन का उल्लेख करते हैं जिसने अनेक बार असूरी साम्राज्य के विरुद्ध बगावत की थी।

कालांतर में असूरी साम्राज्य की घटती हुई शक्ति के रहते ही खल्द में फिर राजनीतिक सत्ता की प्रतिष्ठा हुई और न केवल वह उस साम्राज्य से सर्वथा स्वतंत्र हो गया वरन्‌ शीघ्र ही उसने असूरिया के अधिकतर प्रांतों के साथ साथ ईरान, इसराइल और मिस्र तक पर अधिकार कर लिया। इस खल्दी सत्ता को प्रतिष्ठित करनेवाले नबोपोलज्जार के पुत्र नेबूखदनेज्जार (7वीं सदी ई. पू.) ने खल्दी शक्ति को चोटी तक पहुँचा दिया। उसके द्वारा जुरूसलम का विध्वंस इतिहास प्रसिद्ध है। विध्वंस के बाद उसने वहाँ के विचारवान नेताओं को पकड़कर बाबुल में कैद कर लिया। उनके नाम बाइबिल की प्राचीन पोथी में लिखे हैं और उनके बंदीकाल को महत्वपूर्ण तथा पुनीत माना गया है। बाइबिल की पुरानी पोथी के पहले पाँच खंड उसी बंदीकाल में बाबुल में ही प्रस्तुत हुए थे जिनका नाम पेंतुतुख पड़ा। नेदुखदनेज्जार के बाद उसका नाती बलशेज्जार खल्द का अंतिम सम्राट हुआ जिसके जशनों का बयान करते हुए प्राचीन पोथी में लिखा है कि जब उसका नाचरंग चल रहा था तभी उसके महल की दीवार से एक हाथ निकला जिसने दीवार पर लिख दिया-‘मेंने मेने तेकेल उफ़ार्सीन’ तुम्हें तराजू में तौला गया है और तुम बहुत हल्के सिद्ध हुए हो। ठीक तभी ईरानियों ने बाबुल का सिंहद्वार तोड़कर बेलशेज्जार का जशन समाप्त कर दिया और खल्द की सत्ता का वह केंद्र सदा के लिए टूट गया। खल्दियों का नाम बाबुलियों की ही भाँति तब से केवल फलित और गणित ज्योतिष के संदर्भ में लिया जाने लगा। (भ. श. उ.)



टीका टिप्पणी और संदर्भ